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‘बस नाम रहेगा अल्लाह का’, कॉकरोच जनता पार्टी का नया नारा

बीते एक महीने से आम आदमी पार्टी से जुड़े अभिजीत दीपके ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर डेरा डाला हुआ है. पहले वे अपनी वामपंथियों की टीम के साथ वहां प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उनके आकाओं द्वारा स्क्रिप्ट में बदलाव करने के बाद देश विरोधी मंशा रखने वाले सोनम वांगचुक को कथित भूख हड़ताल पर बैठा दिया गया. ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से सोशल मीडिया हैंडल चलाने वाले अभिजीत नीट पेपर के लीक होने पर विरोध करने का बहाना लेकर अमेरिका से भारत वापस लौटे थे. लेकिन अब उनके इस प्रदर्शन ने पूरी ही तरह हिंदू विरोधी होने का रूप ले लिया है.  

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की एक टिप्पणी का गलत अर्थ निकालने के बाद सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम का कथित आंदोलन अस्तित्व में आया था. अभी तक आंदोलन का चेहरा रहे अभिजीत दीपके ने देश के युवाओं को गलत मंशा से अपने साथ जोड़ने की पूरी कोशिश की लेकिन सोशल मीडिया की चमक-धमक सड़को पर नहीं उतर पाई.

6 जून को दिल्ली में आयोजित एक दिवसीय विरोध-प्रदर्शन से पहले वामपंथी नेता वृंदा करात से मुलाक़ात करने, प्रदर्शन के दौरान तेज गर्मी के कारण निर्धारित समय से पहले ही कार्यक्रम छोड़कर भागने पर अभिजीत अपनी फजीहत करा चुके हैं. इसी प्रकार, उनके सहयोगी सौरव दास से जुड़े कुछ वीडियो, जिनमें एक व्यक्ति उन्हें हाथ वाले पखे  से हवा करता हुआ दिखाई देता है और वे कॉफी पीते हुए नज़र आते हैं, सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने.

लखनऊ, अमृतसर और जयपुर सहित विभिन्न शहरों में आयोजित विरोध-प्रदर्शनों में उम्मीद से बेहद कम संख्या में लोगों के आने पर आंदोलन से जुड़े लोग बोख़लाए हुए दिखे. जयपुर में राष्ट्रवादी छात्रों द्वारा अभिजीत दिपके की ज़ोरदार पिटाई ने उन्हें अपने चहेते नेता ‘केजरीवाल’ का दुख समझने का भी मौक़ा दिया. यह आंदोलन मुख्यतः आधुनिक, सुविधाभोगी और अपेक्षाकृत संपन्न सामाजिक पृष्ठभूमि से आने वाले ऐसे युवाओं द्वारा संचालित है, जिनका जनांदोलनों या ज़मीनी राजनीतिक संघर्ष का अनुभव नहीं के बराबर रहा है. यह एलीट युवा सोशल मीडिया पर लोकप्रियता अर्जित करने के बाद, अपने नकली प्रभाव के दम पर राजनीतिक पहचान और सार्वजनिक जीवन में प्रवेश करने के सपने सजाने लगा है.

कॉकरोच जनता पार्टी के तीन आधिकारिक प्रवक्ता सौरव दास, विजेता दहिया और आशुतोष रांका, तीनों ही धर्म के नाम पर भयंकर झूठ फैलाने, हिंदुओँ को जातियों में बांटने और भारत के टुकड़े-टुकड़े करने के ख्वाब देखने वालों की सूची में बड़ा नाम हैं. इनमें आशुतोष रांका पूर्व में आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम से जुड़े रहे हैं. पार्टी के अन्य प्रवक्ताओं को लेकर भी समय-समय पर विवाद सामने आए. सौरव दास का नाम उस समय चर्चा में आया जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े एक मामले में न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा के संबंध में सोशल मीडिया पर की गई अपमानजनक टिप्पणी के मामले में उन्हें नोटिस जारी किया. उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर को लेकर भी विवादित टिप्पणियां की हैं. इसके अतिरिक्त, 30 दिसंबर, 2025 को उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था: ‘सबसे बहादुर उमर खालिद से मुलाकात हुई. झूठे और बेबुनियाद आरोपों में पांच वर्ष जेल में बिताने के बाद भारत की न्यायपालिका पर एक कलंक लग गया है. उनके प्रति मेरा असीम सम्मान है और उनके अदम्य साहस के लिए हार्दिक शुभकामनाएं.’

इसी प्रका, कंटेंट राइटर और डिजिटल कंटेंट निर्माता के रूप में कार्य करने वाले विजेता दहिया यूट्यूबर ध्रुव राठी के लिए कंटेंट लिखते हैं. उनके अनेक वीडियो और डिजिटल कंटेंट भी विवाद का विषय बने, इन वीडियो में भगवान शिव, आदि शंकराचार्य, दक्ष प्रजापति और सती जैसे धार्मिक विषयों पर आपत्तिजनक  और गलत जानकारी दी गई है, इन वीडियो को लेकर अनेक लोगों ने आपत्ति व्यक्त की और उनका आरोप है कि ऐसी प्रस्तुतियां हिंदू धार्मिक आस्थाओं का अपमान करती हैं. इसी प्रकार ब्राह्मणवाद, सामाजिक परंपराओं तथा महिलाओं से जुड़े विषयों पर वक्तव्यों और वीडियो की भी व्यापक आलोचना हो रही है. एक अन्य वीडियो में वे मालेगांव और हरियाणा से जुड़े कुछ घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए तथाकथित ‘हिंदू आतंकवाद’ सिद्धांत के समर्थन में तर्क प्रस्तुत करते दिखाई देते हैं.

‘जेन-ज़ी’ के नाम पर बना यह सोशल मीडिया आंदोलन जितनी तेज़ी से लोकप्रिय हुआ, उतनी ही तेजी से जंतर-मंतर पर चल रहे इसके धरने को लेकर आयोजकों की कार्यशैली, मंशा भी सामने आने लगी. आंदोलन का घोषित उद्देश्य पेपर लीक को रोकना था. लेकिन दिल्ली का जंतर-मंतर अब हिंदू विरोधी भड़काऊ भाषणों का केंद्र बन चुका है.

जंतर-मंतर पर आयोजित इस आंदोलन के मंच पर आमंत्रित वक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और वामपंथी छात्र नेताओं के भाषणों ने भारत के प्रति उनके भीतर भरे ज़हर को खुलकर सामने ला दिया है. धरने के समर्थन में पहुंचीं दिल्ली विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन की पूर्व अध्यक्षा नंदिता नारायण भी अपने वांमपंथी विचारों, वक्तव्यों और गतिविधियों के कारण लंबे समय से विवादों में रही हैं. नंदिता नारायण के पति राशिद अंसारी हार्ड कोर इस्लामिस्ट और पूर्व उप राषट्रपति हामिद अंसारी के परिवार से आते हैं. जंतर-मंतर पर आंदोलन में शामिल होने आई नंदिता ने अपनी वैचारिक लाइन के अनुसार अपने दिल की बात कही. एक वीडियो में भाषण देते हुए नंदिता कहती हैं, अल्लाह का मतलब वो शक्ति जो हम सब में हैं. बस नाम रहेगा अल्लाह का, जो ग़ायब भी है, हाज़िर भी..” वह यह भी कहती है कि इसी पंक्ति से “राइट विंग” को आपत्ति होती है क्योंकि “उन्हें समझ नहीं आता कि यह उच्च श्रेणी का वेदांत है.” इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं. आलोचकों ने आरोप लगाया कि बिना किसी गंभीर दार्शनिक आधार के वेदांत का संदर्भ देकर हिंदू दर्शन की मनमानी व्याख्या की जा रही है, जिससे धार्मिक भावनाओं के साथ अनावश्यक खिलवाड़ होता है.

इसी प्रकार सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो में नेहा भारती स्वयं को दलित और हिंदू विरोधी आवाज़ के रूप में पेश करती हैं. एक वीडियो में वे यह कहती हुई दिखाई देती हैं कि दलित स्वयं को हिंदू नहीं मानते और मंदिरों में उनके साथ भेदभाव होता है, जबकि मस्जिदों में उन्हें इस प्रकार की बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ता.  इसके अतिरिक्त, नेहा भारती  रमज़ान के दौरान जामा मस्जिद में खाना बांटते दिखाई देती हैं. क्या कॉकरोच जनता पार्टी प्रदर्शन का असली मकसद हिंदुओं को बांटना है? प्रदर्शन में छात्रों, परीक्षा की बात सिर्फ बहाना है, इनका असली मकसद हिंदुओं के ख़िलाफ़ बात करना है? इससे आंदोलन की प्राथमिकताओं को लेकर नए प्रश्न खड़े हुए.

इसी क्रम में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ  की संयुक्त सचिव दानिश अली ने आयोजित सभा को संबोधित करते हुए कई विवादास्पद टिप्पणियां कीं. अपने संबोधन के दौरान दानिश अली ने जेएनयू के सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज़ का उल्लेख करते हुए शरजील इमाम और उमर खालिद का नाम लिया. उन्होंने कहा, दोस्तों, मेरा नाम दानिश है और मैं सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज़ से हूँ. यही वह केंद्र है, जहाँ से हमारे साथी शरजील इमाम और उमर खालिद भी रहे हैं. यह पूछिए कि वे इतने वर्षों से जेल में क्यों हैं.  

बीते हफ्ते अभिनेता प्रकाश राज भी जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक को समर्थन देने पहुंचे. उन्होंने भाषण देते समय कहा, ‘वे जय श्री राम कहेंगे, मैं जय संविधान कहूंगा.’ जिसपर सभी लोग तालियां बजाते हैं. प्रकाश राज की हिंदू धर्म विरोधी भावना किसी से छिपी नहीं है. वे खुद भी खुलकर धर्म का विरोध और इस्लाम का समर्थन कर चुके हैं. ऐसे में यह पूरी तरह साफ हो जाता है कि कॉकरोच जनता पार्टी के नाम पर देश में हिंदू धर्म पर सीधे हमला किया जा रहा है.

यह आंदोलन अपने मूल उद्देश्य से अधिक विवादों के कारण चर्चा में रहा. आंदोलन के प्रमुख चेहरों, प्रचार-प्रसार से जुड़े व्यक्तियों की वैचारिक पृष्ठभूमि, उनके पूर्व संबंधों, सार्वजनिक वक्तव्यों  ने इसकी विश्वसनीयता पर लगातार प्रश्न खड़े किए. इसके साथ ही मंच पर आमंत्रित वक्ताओं की पृष्ठभूमि, धार्मिक विमर्श, राजनीतिक प्रतीकवाद और नेतृत्व शैली से जुड़े विवादों ने भी आंदोलन के घोषित उद्देश्य को चुनौती दी.

यह आंदोलन उन लोगों के लिए भी एक नया सार्वजनिक मंच बन गया, जिनकी वैचारिक स्वीकार्यता लगभग समाप्त हो चुकी थी या जिनकी बातों को लंबे समय से व्यापक जनसमर्थन नहीं मिल रहा था. साथ ही यह धारणा भी उभरी कि सोशल मीडिया के माध्यम से शीघ्र लोकप्रियता अर्जित कर स्वयं को व्यवस्था परिवर्तन का चेहरा प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है. धीरे-धीरे आंदोलन से जुड़े सभी लोगों के पत्ते खुलेंगे और तब छात्र आंदोलन की शक्ल में चल रहे भारत विरोधी प्लान की सच्चाई सभी के सामने स्पष्ट रूप से आ जाएगी.