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जेएनयू में छात्राओं पर नंबर देने के बदले यौन संबंध बनाने का दबाव डालते कांग्रेस पार्टी के लोकसभा सांसद

जेएनयू में छात्राओं पर नंबर देने के बदले यौन संबंध बनाने का दबाव डालते कांग्रेस पार्टी के लोकसभा सांसद

बीते दिनों भारत में महिलाओं की दशा पर बहुत बात हुई. पुणे के बड़े से मैदान में भीड़ बुलाई गई, नारीवाद के सभी स्वघोषित धुरंधर इकट्ठा हुए और एक स्वर में ये बताया गया कि कैसे सनातन धर्म और धर्मग्रंथ महिलाओं के विरोधी है. ये संदेश देने का प्रयास किया गया कि हिंदुत्व ने ही महिलाओं को इतने समय तक घर से निकलने नहीं दिया. आज वे स्वघोषित नारीवादी खोजने पर भी नहीं मिल रहे है.

वर्षों तक इस देश के वामपंथियों ने जिस संस्थान को हिंदुस्तान का सबसे आधुनिक और विचारशील संस्थान के रूप में चित्रित किया, आज उसकी कलई खुल गई है और नाम सामने आया है इन स्वघोषित नारीवादियों के आश्रयदाता दल से जुड़े हुए सांसद बिमल अकोइजम का. सांसद का नाम आते ही सारे नारीवादी, आधुनिक विचारक, नेता, अभिनेता सभी न जाने कौन सी दुनिया में विलुप्त हो गए. न तो किसी का कोई बयान सामने आया है और न ही किसी ने संबंधित मुद्दे पर संवेदना जताने का साहस किया है.

मामला जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय का है जहां पढ़ाने वाले एक प्रोफेसर और कांग्रेस पार्टी के लोकसभा सांसद पर 11 छात्राओं को नंबर देने के बदले यौन संबंध बनाने की मांग करने का आरोप है. पीड़ित छात्राओं ने मई 2026 में शिकायत दर्ज कराई थी मगर अभी तक किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं हुई है. पीड़ित छात्राओं के अनुसार मई 2026 के पहले हफ्ते में जब प्रायोगिक परीक्षा चल रही थी तब प्रोफेसर द्वारा एक छात्रा को नंबर देने के प्रलोभन में यौन प्रस्ताव दिया गया जिसे छात्रा द्वारा मना कर दिया गया. जब छात्रा ने उपरोक्त प्रकरण विश्वविद्यालय के व्हाट्सअप ग्रुप में शेयर किया तब 10 अन्य छात्राओं ने भी इसी तरह के अनुभव शेयर किए.

उन्होंने यह भी बताया की उक्त प्रोफेसर द्वारा कक्षाओं में भी ऐसी टिप्पणी की जाती रही है जो उनके लिए असहज करने वाली होती हैं. छात्राओं ने अपनी शिकायत विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच समिति में दर्ज कराई, बाद में छात्राओं को उनके बयान दर्ज करने के लिए बुलाया भी गया परंतु अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई. सामान्यतः ऐसे मामलों में 90 दिन के भीतर कार्यवाही करने का प्रावधान है लेकिन अभी तक ऐसी कोई भी कार्यवाही नहीं हुई, हर बार जानकारी मांगे जाने पर प्रशासन इसे आंतरिक मामला बताकर टाल देता है.

इतने दिनों तक सांसद का नाम गोपनीय रखने की तमाम कोशिशों के बावजूद नाम से पर्दा तब उठा जब 8 सितंबर को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आंदोलन किया और बयान जारी कर प्रत्यक्ष रूप से मणिपुर की इनर मणिपुर से कांग्रेस सांसद और जवाहर लाल विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर बिमल अकोइजम पर आरोप लगाया और उनपर कार्यवाही की मांग की. छात्राओं के मुताबिक उन्होंने मई 2026 में ही शिकायत दर्ज कराई थी और 90 दिन के भीतर कार्यवाही का प्रावधान होने के बाद भी अभी तक कुछ नहीं हुआ. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि दुनिया के किसी भी कोने में कुछ भी हो जाने पर सबसे पहले ढपली और माइक निकाल लेने वाले तथाकथित प्रबुद्ध लोग कहां गए जब उनके ही विश्वविद्यालय में इस तरह महिलाओं के साथ गलत व्यवहार हो रहा है?

जो संस्थान हर एक बात पर आंदोलन करने की शक्ति के लिए विख्यात हो और जिसकी वजह से भारत में सरकार गिराने की कोशिशों को भी छात्र आंदोलनों बताया गया हो, वह चुप क्यों है? जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय भारत के ढहते वामपंथ की इमारत का आखिरी हिस्सा है जिसने सदैव नारीवाद का अंधा समर्थन किया है वह भी इस पर चुप है. कुछ दिनों पहले तक भारत में क्रांति ला देने की सौगंध खा कर घूमने वाली नेहा वोहरा अचानक से मौन क्यों हो गई है? सरकार का लेखा-जोखा लेते घूम रहे अभिजीत दीपके और समस्त तिलचट्टा गैंग भी नदारद है. कुछ दिन पहले तक भारत से पुरुषसत्ता को खत्म करने का दंभ भरने वाले राहुल गांधी और उनकी कांग्रेस पार्टी अपने ही सांसद की इस घटिया करतूत पर मौन है.

यहां ये बात भी गौरतलब है कि उपरोक्त सांसद कांग्रेस पार्टी का नोर्थ इस्ट भारत से आने वाला प्रमुख सांसद है जिसने सरकार को हर बार घेरने का काम किया. मणिपुर के बारे सरकार को घेरने का सारा दारोमदार इन्हीं पर था. हालांकि मणिपुर के बारे में इनके विचार खासा विवादित रहे है. 2026 में इनके मणिपुर के भारत के साथ विलय और एनआरसी पर दिए गए बयान ने मणिपुर में विवाद खड़ा कर दिया था और मणिपुर के 14 संगठनों ने इनका कड़ा विरोध किया था. उस समय न तो राहुल गांधी और न ही कांग्रेस ने इनका विरोध किया. मणिपुर हिंसा के समय राजनीतिक हित साधने के लिए बिमल अखजोई को आगे करने वाले राहुल गांधी यह भूल गए कि उनके इस सांसद ने असम राइफल पर भी विवादित बयान दिया था. आज जब बिमल अखजोई पर इतने गंभीर आरोप लगे है तब राहुल गांधी की चुप्पी इस बात की ओर इशारा करती है कि राहुल गांधी के लिए उनके प्यादे नारी अस्मिता से ज्यादा महत्वपूर्ण है.

कुछ दिनों पहले जब राहुल गांधी स्मैश द पैट्रीआर्की का जब नारा बुलंद कर रहे थे तो उन्होंने बार-बार भारतीय ज्ञान परंपरा और ग्रंथों को निशान बनाया मगर अब जब उनके ही सांसद पर इतने गंभीर आरोप लग रहे है तो उन्हें इस बात पर भी प्रकाश डालना चाहिए कि उनका यह नारीवादी योद्धा किस सनातन ग्रंथ से प्रेरणा ले रहा था? ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:’ की किस व्याख्या ने उसे इस घृणित कार्य के लिए उकसाया?  

इसके अतिरिक्त यह मामला जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की वाम पक्ष की छात्र राजनीति पर भी एक प्रश्न है. रोज शाम को नियमित रूप से मुद्दों को ढूंढकर उनपर विलाप करने वाले आज अपने ही विश्वविद्यालय में नारी अस्मिता के हनन पर चुप क्यों है?

इन तमाम प्रश्नों का उत्तर यदि ईमानदारी से पूछा जाए तो उसका जवाब सिवाय इन तमाम विचारधाराओं के दोहरे रवैये के कुछ नहीं होगा. ये दोहरापन केवल आज इस मुद्दे पर ही सीमित नहीं है. मणिपुर के लिए व्याकुल लोग बंगाल में ममता राज हुई हिंसा और पंजाब में बढ़ रहे नशे में कुछ गलत नहीं पाते. जब झारखंड में युवा बिना संसाधनों और राजनीतिक समर्थन के अपने हक के लिए लड़ाई लड़ रहे थे तब भी ये सभी नदारद थे? जब बंगाल के आर जी कर अस्पताल में बलात्कार की घटना हुई तब भी ये नारीवादी योद्धा मौन रहे? जब कभी भी भारतीय जनता पार्टी के शासन वाले राज्य में कोई विवाद होता है तो ये सबसे पहले क्रांति की मशाल लिए आ जाते है परंतु जब कभी भी विपक्ष के शासन की सरकार में कोई भी अनियमितता होती है तो ये मौन हो जाते है. दुनिया के किसी भी देश के विपक्ष को ऐसे दोहरे विचारों वाले नहीं होना चाहिए.

इनकी क्रांति अवसरवादी है. इनका विरोध चयनात्मक है. हर बात पर सीधे प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांग लेने वाले ये क्रांतिवीर आज इस मुद्दे पर मौन है. डरों मत, लड़की हूं, लड़ सकती हूं जैसे नारे देने वालों के लिए यह तमाम संवेदनशील मुद्दे महज राजनीति का माध्यम है. इन्हें अनाहक ही भारतीय सभ्यता पर प्रहार करना होता है और यहीं कारण है कि ये तमाम कोशिशों के बाद भी असफल ही है. इनकी वैचारिक पंगुता विषय आधारित न होकर केवल सत्ता लिप्सा से प्रेरित है इसलिए ही इन्हें न तो देश को जाति में तोड़ने में हिचक है और न ही किसी भी प्रकार के वितंडावाद से.

इस बार इनके इस प्रपंच का शिकार जवाहर लाल नेहरू की 11 लड़कियां बनी है जिन्होंने अपने भविष्य के लिए यह सोचकर दाखिला लिया था कि वे अपने जीवन में कुछ सार्थक कर सही अर्थ में पुरुष सत्ता से लड़ सके मगर उनके मार्ग में बाधा डालने का काम एक ऐसे व्यक्ति ने किया जो स्वघोषित नारीवादी था, जिसने महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए न जाने कितने व्याखान दिए होंगे? इसका एक पक्ष जवाहरलाल विश्वविद्यालय के प्रशासन की ऐसे घृणित कामों में एकता भी है जिस कारण लगभग 4 माह बाद भी लड़कियों को न्याय नहीं मिल पा रहा.       

नित्य नगीना मिश्र
नित्य नगीना मिश्र
नित्य नगीना मिश्र भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली में पत्रकारिता के छात्र हैं.