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देश की नई समस्या – कॉकरोच जनता पार्टी

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी के गलत मायने निकालने से शुरू हुए कॉकरोच जनता पार्टी नाम के एक इंस्टाग्राम अकांउट के एडमीन अभिजीत दीपके, जो खुद को तथाकथित पार्टी का नेता मानते हैं, ने 6 जून को राजधानी दिल्ली में अपने फॉलोअर्स की भीड़ बुलाकर प्रदर्शन किया.

कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा इस क्रांति-प्रदर्शन में पार्टी के नेताओं ने बताया कि यह प्रदर्शन “जनहित के किसी अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे” के समर्थन में था. हालांकि प्रदर्शन समाप्त होने तक किसी को यह पता नहीं चल पाया कि वह मुद्दा आखिर क्या था. सुबह से ही सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां लेकर जंतर-मंतर पहुंच गए. कुछ तख़्तियों पर, “हम संघर्ष करेंगे!”, कुछ पर लिखा था, “हम विरोध करते हैं!” जैसे नारे लिखे थे, जबकि कुछ अधिक दूरदर्शी कार्यकर्ताओं ने केवल “कुछ तो गड़बड़ है” लिखकर अपनी वैचारिक स्वतंत्रता सुरक्षित रखी.

अभिजीत अमेरिका में रहते हैं और 6 तारीख को ही दिल्ली पहुंचे थे. दिल्ली पहुंचते ही यहां की गर्मी देखकर उनकी क्रांति की हवाइयां उड़ गई. कुछ सौ वामपंथियों की भीड़ को उन्होंने देश की आवाज़ और युवा का आक्रोश मान लिया. प्रदर्शन में आए अधिकतर लोग क्रांति शब्द से भी परिचित नहीं थे. एलीट घरों के बेवकूफ बच्चों का जमावड़ा जो खुद को नेता मान रहा था, देश की तासीर, सभ्यता, स्थिति, समाज सभी से पूरी तरह अनजान था.

इंस्टाग्राम पर रील बनाकर अजीब तरह का डांस करने वाले पार्टी के शीर्ष नेता क्रांति की गंभीरता पर चर्चा कर रहे थे. चर्चा के दौरान उनके सामने महंगे गिलासों में कोल्ड कॉफी रखी हुई थी. गर्मी अधिक थी, इसलिए एक व्यक्ति को विशेष रूप से हाथ वाला पंखा झलने के लिए नियुक्त किया गया था. नेता बीच-बीच में कॉफी की चुस्की लेते, पंखे की हवा का आनंद उठाते और फिर जनता को त्याग, संघर्ष तथा सादगी का महत्व समझाते दिखे.

एक नेता ने जोशीले अंदाज में घोषणा की, “यह आंदोलन इतिहास बदल देगा!” जब उनसे पूछा गया कि किस विषय पर आंदोलन चल रहा है, तो उन्होंने कहा, “विषय से अधिक महत्वपूर्ण आंदोलन की भावना होती है.”

उधर प्रदर्शनकारियों की स्थिति और भी रोचक थी. एक कार्यकर्ता ने बताया कि वह अमरीका द्वारा ईरान पर हमले के विरोध में आया है. दूसरे ने कहा कि यह पर्यावरण बचाने का आंदोलन है. तीसरे ने स्वीकार किया कि उसे बस बताया गया था कि यहां नारे लगाने हैं, इसलिए वह आ गया. चौथे ने बस एक बात तीन बार कही – आज़ादी, आज़ादी, आज़ादी.

स्थिति तब और विचित्र हो गई जब मंच संचालक ने नारा लगाया, “हम क्या चाहते हैं?” भीड़ ने कुछ क्षण विचार किया और फिर अलग-अलग दिशाओं से उत्तर आए—”न्याय!”, “रोजगार!”, “समोसे!”, “छुट्टी!”, और एक उत्साही युवक ने “एक और कोल्ड कॉफी!” भी चिल्ला दिया.

इस बीच मंच के पीछे क्रांति की रणनीति पर गहन चर्चा चल रही थी. सूत्रों के अनुसार चर्चा का मुख्य विषय यह था कि अगली बार कॉफी वनीला फ्लेवर की रखी जाए या हेज़लनट की. दोपहर तक प्रदर्शन पूरी तरह अव्यवस्था में बदल चुका था. कुछ लोग भाषण सुन रहे थे, कुछ सेल्फी ले रहे थे, कुछ नारे भूल चुके थे और कुछ यह खोजने में लगे थे कि वे आखिर यहां आए क्यों थे.

दिन के अंत में कॉकरोच पार्टी ने वक्तव्य जारी कर प्रदर्शन को “ऐतिहासिक सफलता” बताया. यह नहीं बताया गया कि सफलता किस बात की थी, लेकिन पार्टी ने विश्वास जताया कि जनता सब समझती है.

जनता वास्तव में सब समझ रही थी. बस वही नहीं, जो पार्टी समझाना चाहती थी. देश के मूल मुद्दों को मज़ाक बनाने वाले ये कथित युवा देश और समाज के लिए सर दर्द बनकर रह गए हैं. देश में राड़ डालने के लिए एजेंड़ा चलाकर हिंदू धर्म से जुड़ी हर चीज का विरोध करने वाले यह एलीट बच्चे भारत की धरती और भारत से बाहर रहकर, हर तरह से भारत को अस्थिर करने पर तुले हुए हैं.

झूठ, घृणा, हिंसा फैलाना इनका पहला लक्ष्य है. युवाओं के नाम पर अपना मतलब निकालने का अब इन्होंने एक नया तरीका ढूंढा है, जो इंस्टाग्राम की रंगीन दुनिया में तो सफल हो गया लेकिन दिल्ली की गर्मी में पिघल गया. देखना यह है कि इनके झूठ की पूरी सच्चाई सामने आने के बाद यह सोशल मीडिया पर भी कितने दिन टिकते हैं.      

हरमिंदर
हरमिंदर
हरमिंदर की पहचान उनकी इच्छा के अनुसार गोपनीय रखी गई है.