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राहुल गांधी के झूठ को बेनकाब करती ‘झूठ की गूंज’ वेबसाइट

पूणे में सजे हुए मंच पर खड़े राहुल गांधी पित़ृसत्ता, शोषण, हिंसा जैसे शब्दों की आड़ में देश के युवाओं को झूठ परोसकर उन्हें सरकार के ख़िलाफ़ भड़काने की पुरज़ोर कोशिश करते नज़र आए. ऐसा वे पहले भी कई कार्यक्रमों में कर चुके हैं. बीते कुछ समय से वह छात्रों की गूंज नाम से कान्सर्ट टाइप कार्यक्रम कर रहें हैं, जिसमें हीरो की तरह एंट्री, गाना बजाना, नाचना और घटिया किस्म के तथ्य रखकर अपनी छवि चमकाने के प्रयास होते हैं. लेकिन भारत का युवा सिर्फ वैसा नहीं है जैसा विपक्षी दल बताते हैं. विरोधी ताकतों और राजनीतिक परजीवियों ने युवाओं के उबाल को अपने स्वार्थ के लिए भुनाने और इसे एक खास राजनीतिक संगठन का चोला पहनाने की जी तोड़ कोशिश की और कॉकरोच का नाम दिया गया, लेकिन भारतीय युवा इन क्षुद्र राजनीति से कहीं ऊपर उठकर राष्ट्र और समाज के प्रति अपना दायित्व बखूबी निभा रही है.

विदेशी दौरों पर जाकर भारतीय लोकतंत्र, संवैधानिक संस्थाओं और संप्रभुता पर कीचड़ उछालना, बिना किसी अध्ययन के देश-विदेश में अपरिपक्व भाषण देना और संसद की कार्यवाही को बाधित करना— नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की यह आदत नई नहीं है. लेकिन जब कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त संसद का नेता प्रतिपक्ष ‘छात्रों की गूंज’ जैसे अभियानों की आड़ में देश के युवाओं का बौद्धिक उत्पीड़न कर सरकार के ख़िलाफ़ उनका ब्रेनवॉश करने के लिए झूठे आंकड़े पेश करता है, तो यह लोकतंत्र और देश के साथ गंभीर खिलवाड़ है.

लेकिन अब इसी जागरूक  जेनरेशन ने महज दो महीने के भीतर पूरी कांग्रेस पार्टी, उसके दरबारी इकोसिस्टम और उनके आलाकमान राहुल गांधी की झूठी राजनीति की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं. जून 2026 में राहुल गांधी ने आम युवाओं से जुड़ने के नाम पर ‘छात्रों की गूंज’ नामक एक प्रचार-अभियान शुरू किया था, ताकि एक बार फिर युवाओं को भीड़ के रूप में इस्तेमाल कर सरकार के ख़िलाफ़ खड़ा किया जाए. लेकिन यह कार्यक्रम युवाओं से जुड़ने का ज़रिया कम और बिना किसी अध्ययन, तथ्यात्मक जांच एवं बिना किसी नैतिक जिम्मेदारी के मंच से खड़े होकर सफेद झूठ परोसने का अड्डा अधिक बन गया.

बड़े मंचों से बड़े नेताओं द्वारा बोला गए हर एक बोल पर एक आम युवा यह सोचकर भरोसा कर लेता है कि इतने बड़े मंच से बोला गया शब्द सच होगा, लेकिन राहुल गांधी इसी भरोसे का सौदा कर रहे थे. अब कांग्रेस के इस पाखंड की पोल तब खुली जब आईआईटी मद्रास की एक छात्रा ने राहुल गांधी के राजनीतिक फरेब को बेनकाब करने का बीड़ा उठाया. इस युवा छात्रा ने राहुल गांधी के दिए बयानों की परत-दर-परत तथ्यात्मक जांच की और “झूठ की गूंज” नाम से एक वेबसाइट बनाकर कांग्रेस के झूठ के पुलिंदों को सबके सामने रख दिया.

इस वेबसाइट ने देहरादून, कोटा, प्रयागराज और पुणे जैसे चार प्रमुख शहरों में राहुल गांधी द्वारा दिए गए लगभग 40 बयानों का 134 से ज्यादा आधिकारिक सरकारी डेटा (PLFS, UDISE+, नीति आयोग) और प्रामाणिक रिपोर्टों के आधार पर विस्तृत पोस्टमार्टम किया है. 

इस जांच में सामने आया कि राहुल गांधी के 40 में से 29 दावे पूरी तरह से मनगढ़ंत व झूठे थे और 11 दावे बेहद भ्रामक थे. रोजगार पर झूठा रोना रोते हुए कोटा में युवाओं के बीच ज़हर घोलते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि “1000 नौकरी ढूंढने वाले युवाओं में से 300 पूरी तरह बेरोजगार रहते हैं और 700 केवल गिग वर्कर बनने को मजबूर हैं.”

तथ्य: PLFS के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 15-29 वर्ष के 100 में से 26 शिक्षित स्नातक नियमित स्थायी वेतनभोगी नौकरियों में हैं. गिग वर्कर्स को लेकर राहुल गांधी का दिया गया आंकड़ा केवल युवाओं में कुंठा और निराशा पैदा करने की सोची-समझी साजिश थी.

भारत की वैश्विक छवि पर हमला करते और कथित सनसनीखेज आंकड़े पेश करते हुए पुणे कार्यक्रम में राहुल गांधी ने संवेदनहीनता की सारी सीमाएं लांघते हुए सार्वजनिक मंच से कह दिया कि “भारत में 100 में से 6 महिलाएं सक्रिय रूप से बलात्कार का शिकार होती हैं और 99% मामलों की रिपोर्ट ही दर्ज नहीं होती.” 

तथ्य: एनसीआरबी और एनएचएफएस  के प्रामाणिक आंकड़े राहुल के इस बयान को पूरी तरह बकवास साबित करते हैं. आंकड़े दर्शाते हैं कि मोदी सरकार में घरेलू हिंसा और अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति से स्थिति में सुधार हुआ है. ज़ीरो एफआईआर, बिना पुलिस स्टेशन जाए ऑनलाइन रिपोर्टिंग, नए बीएनएस के तहत 2 महीने की इन्वेस्टिगेटिशन डेडलाइन, इन सभी नियमों ने  महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध पर रोक लगाने में एक अहम भूमिका निभाई है. 

एनसीआरबी के आंकड़ों से पता चलता है कि 100 में से 6 नहीं, बल्कि प्रति लाख महिलाओं पर लगभग 4.3 बलात्कार के मामले दर्ज किए जाते हैं. साफ पता चलता है कि केवल विदेशी मीडिया में सुर्खियां बटोरने और भारत को बदनाम करने के लिए राहुल गांधी ने इस तरह के घिनौने और गलत आंकड़े परोसे हैं.

पुणे कार्यक्रम में ही राहुल गांधी ने दावा किया कि “देश में बड़े पैमाने पर सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं और 45% छात्राएं केवल शादी के कारण पढ़ाई छोड़ देती हैं.” जबकि सच्चाई यह है कि UDISE+ की 2025-26 रिपोर्ट के आधार पर लड़कियों की माध्यमिक विद्यालय छोड़ने की दर 8 % बताई गई है. यहां ड्रॉपआउट के वास्तविक कारणों पर बात करने के बजाय राहुल गांधी ने नीट, आईआईटी प्रवेश सीटों और कोचिंग संस्थानों को लेकर मनगढ़ंत आंकड़े उछाले, ताकि प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को भड़काया जा सके.

अर्थव्यवस्था और ‘कॉर्पोरेट मित्र’ का घिसा-पिटा राग अलापते हुए राहुल गांधी ने अपने भाषणों में यह झूठ दोहराया कि भारत का सारा धन और बैंक लोन केवल 2-3 उद्योगपतियों की जेब में जा रहा है और एमएसएमई पूरी तरह तबाह हो चुके हैं. जबकि आरबीआई और वित्तीय संस्थानों के डेटा के अनुसार, पिछले एक दशक में मुद्रा योजना और स्वनिधि योजना के जरिए करोड़ों छोटे उद्यमियों, युवाओं और महिलाओं को बिना गारंटी के लोन दिया गया है.

पीआईबी के मुताबिक मुद्रा योजना के तहत 40.07 लाख करोड़ रुपए मूल्य के 57.79 करोड़ लोन स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें पहली बार उद्यम करने वालों को दिए गए 12 लाख करोड़ रुपए मूल्य के 12.15 करोड़ लोन शामिल हैं. लेकिन इन आंकड़ों को अनदेखा कर और देश की आर्थिक प्रगति से हताश होकर राहुल गांधी आर्थिक आंकड़ों को लेकर खुलेआम झूठ बोल रहे हैं.

‘झूठ की गूंज’ वेबसाइट केवल राहुल गांधी के बयानों को गलत ही नहीं ठहराती, बल्कि हर एक झूठ के ख़िलाफ़ ठोस सुबूत, आधिकारिक दस्तावेज़ और मीडिया रिपोर्ट्स के लिंक्स भी उपलब्ध कराती है. इसने कांग्रेस के करोड़ों रुपए के आईटी सेल और पूरी पार्टी के प्रोपेगैंडा तंत्र की नींव हिलाकर रख दी है.

अब यही ‘झूठ की गूंज’ कांग्रेस के कानों में इस कदर गूंज रही है कि कांग्रेस और उनके आलाकमान जो बीते एक दशक से देश में “बढ़ती असहिष्णुता” और “खतरे में लोकतंत्र” का रोना रोते रहे हैं, जब खुद पर बात आई तब वही असहिष्णु हो रहे हैं और अभिव्यक्ति की आजादी को पैरों तले कुचल रहे हैं.

जैसे ही वैबसाइट ने राहुल गांधी के 40 झूठों का कच्चा-चिट्ठा सार्वजनिक किया, कांग्रेस के तथाकथित ‘उदारवादी’ समर्थकों, चाटुकारों और राहुल फैंस की असली फासीवादी मानसिकता बाहर आ गई. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का राग अलापने वाले कांग्रेसी ट्रोलर्स के बारे में “झूठ की गूंज” वेबसाइट के संस्थापकों और सोशल मीडिया हैंडल ने आरोप लगाया है कि वेबसाइट लाइव होने के बाद से उन्हें कांग्रेस के पीआर तंत्र और आईटी सेल से लगातार दबाव और धमकियां मिल रही हैं.

इसके साथ ही इंस्टाग्राम और एक्स हैंडल को ब्लॉक या बंद कराने के लिए लगातार रिपोर्ट और हमले किए जा रहे हैं. वहीं कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी की लीगल सेल ने इस वेबसाइट और इसे बढ़ावा देने वाले सोशल मीडिया हैंडल्स के ख़िलाफ़ कथित रूप से गलत तथ्य फैलाने के आरोप में पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई है. 

आजकल यह सबसे सरल तरीका हो गया है कि जब कांग्रेस पार्टी पर विपक्ष और जनता के सवालों का जवाब नहीं होता तब सोशल मीडिया अकाउंट को रिपोर्ट कर दो, एफआईआर कर दो, मानहानि का केस कर दो, इस तरह के न्यायिक और राजनीतिक दावं खेलकर अपने झूठ को छिपाया जाता है.

कांग्रेस की सबसे बड़ी गलती यह है कि वह यह जानती है कि राहुल गांधी के द्वारा दिए गए बयान वास्तव में भ्रामक हैं. क्योंकि सारे सबूत, सारी रिपोर्ट राहुल गांधी के उन 40 बयानों को भ्रामक और गलत साबित करती है. लेकिन कांग्रेस की पीआर और आईटी सेल के पास इस समय ‘झूठ की गूंज’ वेबसाइट को काउंटर करने के लिए कोई जवाब नहीं है. 

यही कारण है कि एफआईआर दर्ज कर, ऑनलाइन  ‘झूठ की गूंज’ वेबसाइट और उनके एक्स हैंडल को रिपोर्ट कर इस सच को दबाया जा रहा है. इन्हीं सब कारणों से कांग्रेस की पोल खुलती है कि असहिष्णुता का राग गाने वाले कांग्रेसी अपनी बारी में धैर्य खो बैठते हैं. अपने ख़िलाफ़ होने वाले हर एक सच को बीजेपी का प्रोपेगैंडा, विपक्ष की चाल आदि इत्यादि बताकर अपना पीछा छुड़वाते हैं. 

हाल ही में, जून में सीजेपी केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रही थी, तब कांग्रेस से लेकर सभी वामपंथी गैंग और मीडिया है जेन-ज़ी की पीठ ठोक रहे थे, कि यह जेनरेशन कितनी काबिल है कि उसने केंद्र सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया. 

लेकिन जब इसी जेनरेशन की लड़की राहुल गांधी के सभी दावों को भ्रामक और गलत साबित कर देती है, तब कांग्रेसी इसे बीजेपी का प्रोपेगैंडा बता देती है. यानी जब बात सत्ता पक्ष पर आए तो जेनरेशन कितनी काबिल और होशियार है और जब वही कांग्रेस के झूठ के कच्चे चिट्ठे खोले, तो बीजेपी का प्रोपेगैंडा. कांग्रेस की तरफ से इस तरह की बयानबाजी दिखाती है, कि कांग्रेस में कितना दोगलापन है. 

यही घटनाएं साबित करती है कि कांग्रेस के लिए लोकतंत्र और सहिष्णुता केवल एक सुविधानुसार इस्तेमाल किया जाने वाला राजनीतिक मुखौटा है, जो वह सत्ता पक्ष के ख़िलाफ़ इस्तेमाल करती है. अंततः ‘झूठ की गूंज’ वेबसाइट ने राहुल गांधी के 40 बयानों के ख़िलाफ़ जो 134 से अधिक ठोस और प्रामाणिक तथ्य रखे हैं, वे यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि कांग्रेस के पास देश के युवाओं को देने के लिए कोई विजन नहीं है. “छात्रों की गूंज” अभियान असल में राहुल गांधी के झूठ की गूंज बनकर रह गया है, जिसका एकमात्र मकसद भारत की युवा पीढ़ी को गुमराह करना, उनमें कुंठा भरना और अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाए रखने के लिए देश में अस्थिरता का माहौल पैदा करना था. लेकिन भारत की समझदार जेनरेशन ने कांग्रेस के इस ख़तरनाक एजेंडे को वक्त रहते पहचान कर पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है.

बलराम सिंह पाल
बलराम सिंह पाल
बलराम सिंह पाल एक स्वतंत्र पत्रकार हैं.