दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन के तार आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरिवाल से जुड़े हैं यह बात हम सभी अच्छे से जानते है. वर्तमान समय में देश और खासकर विपक्ष में लोगों को सबसे अधिक गुमराह करने वाली पार्टी यही है. आम आदमी पार्टी वैसे खुद को छात्रों, किसानों और आम जनता की सबसे मुख़र आवाज़ बताती है. लेकिन जब वही पार्टी सत्ता में होती है, तो उसके मानदंड बदल जाते हैं. पंजाब में आप सरकार के काम देखकर, केंद्र की राजनीति में उनके इरादों को देखने के बाद आप की भूमिका संदेह के घेरे में आ ही जाती है.
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद और जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के ज़रिए आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश की. अभिजीत दीपके के अलावा छात्रों के मसीहा बनकर सामने आ रहे कई अन्य लोग भी आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल के करीबी बताए जाते हैं. अरविंद केजरीवाल ने जहां दिल्ली में युवाओं से सड़कों पर उतरने की अपील की, वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र पर युवाओं का भविष्य बर्बाद करने का आरोप लगाया. पार्टी ने इसे केवल परीक्षा घोटाला नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता तक बता डाला.
लेकिन इसी दौरान पंजाब की जनता आप से एक सीधा सवाल पूछ रही है—जो जवाबदेही आप दिल्ली में मांग रहे हैं, क्या वही पंजाब में भी लागू होती है, या फिर आप दिल्ली के छात्रों के बहाने अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं.
नीट विवाद पर आप का रुख बेहद आक्रामक रहा. पार्टी ने कहा कि बार-बार होने वाले पेपर लीक लाखों छात्रों के सपनों से खिलवाड़ हैं. उसने केंद्र सरकार से जवाब मांगा, मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की और परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की बात कही. लेकिन जब पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा विवाद सामने आया, तो सरकार का रुख अलग दिखाई दिया.
पंजाब पुलिस ने ब्लूटूथ डिवाइस, छिपे कैमरों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के ज़रिए कथित नकल कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया और कई लोगों को गिरफ्तार किया. यह सीधे तौर पर पंजाब सरकार और भगवंत मान की विफलता है जिससे पूरी पार्टी भागती नज़र आ रही है.
दूसरी ओर, पंजाब की आप सरकार ने बयान दिया कि पेपर लीक नहीं हुआ, बल्कि परीक्षा शुरू होने के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने तकनीकी साधनों से नकल की. यह कैसा तर्क है?
यह एक बड़ी बहस का विषय है. सच तो यह है कि पंजाब में आपकी सरकार देश-विरोधी गतिविधियों से लेकर गली-मोहल्लों में बिक रहे नशीले पदार्थों को रोकने में असफल रही है. राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कहा कि बिना पंजाब प्रशासन की सांठगांठ के ऐसा संभव ही नहीं है.
यहीं से राजनीतिक बहस शुरू होती है. अगर राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी घटनाएं व्यवस्था की विफलता हैं, तो पंजाब में इन्हें केवल ‘अलग-थलग घटना’ क्यों बताया जा रहा है?
लेकिन क्या यह अकेला मामला है? बिल्कुल नहीं. पंजाब सबऑर्डिनेट सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड (PSSSB) की ग्रुप-बी भर्ती परीक्षा से लेकर अन्य भर्ती प्रक्रियाओं तक कई मामलों में अनियमितताओं के आरोप लगे. कुछ मामलों की जांच विजिलेंस ब्यूरो तक पहुंची.
कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल लगातार कहते रहे हैं कि भर्ती प्रक्रियाओं पर उठे सवालों का जवाब सरकार ने उतनी राजनीतिक गंभीरता से नहीं दिया, जितनी गंभीरता से वह केंद्र सरकार से जवाब मांगती है. लेकिन जब खुद की जवाबदेही की बात आती है, तो आम आदमी पार्टी पीछे हटती हुई दिखाई देती है.
आम आदमी पार्टी राष्ट्रीय राजनीति में किसान आंदोलनों की समर्थक रही है. तीन कृषि कानूनों के विरोध के दौरान पार्टी लगातार किसानों के साथ खड़ी दिखाई दी. लेकिन पंजाब में कई किसान संगठन अब आप सरकार के ख़िलाफ़ विरोधनप्रदर्शन कर रहे हैं. भूमि पूलिंग नीति, न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, अन्य कृषि मुद्दों को लेकर किसान संगठनों ने सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल रखा है.
किसान मजदूर मोर्चा (KMM) ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास तक प्रदर्शन किया और विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की. सरकार ने कई मौकों पर कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रतिबंध और एहतियाती हिरासत का सहारा लिया. किसान संगठनों ने आरोप लगाया कि विरोध के अधिकार पर वही सरकार रोक लगा रही है, जो दूसरे राज्यों में इसी अधिकार की सबसे बड़ी पैरोकार बनती है.
बरनाला में सफाई कर्मचारियों के आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई ने भी सरकार को विपक्ष के निशाने पर ला दिया. प्रदर्शनकारी नियमितीकरण, वेतन वृद्धि आदि की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, जिसके दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ.
पुलिस का कहना था कि प्रदर्शन हिंसक हो गया था, जबकि कर्मचारियों ने पुलिस पर अनावश्यक बल प्रयोग का आरोप लगाया. कर्मचारियों पर हुए लाठीचार्ज के वीडियो और तस्वीरें भी सरकार के दोगलेपन की ओर इशारा करती हैं.
भगवंत मान की सरकार इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहती है कि विपक्ष जानबूझकर पेपर लीक और संगठित नकल के बीच का अंतर मिटा रहा है. उसका दावा है कि भगवंत मान सरकार के कार्यकाल में किसी भी भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ और जहां भी गड़बड़ी हुई, वहां पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की.
जहां एक तरफ आप नीट पेपर लीक को शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री की कमज़ोरी बता रही है वहीं पंजाब में वे ऐसी ही घटना को ‘संगठित नकल’ बोल रही है. यहीं आकर आम आदमी पार्टी अपनी बची हुई विश्वसनियता समाप्त हो जाती है.
आप सरकार कहती है कि उसने हजारों सरकारी नौकरियां पूरी पारदर्शिता और मेरिट के आधार पर दी. लेकिन जनता से लेकर विपक्ष तक कोई भी पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार के इन बयानों से संतुष्ट दिखाई नहीं दिया.
यह विवाद केवल पेपर लीक या भर्ती परीक्षाओं तक सीमित नहीं है. यह उस राजनीतिक नैरेटिव की लड़ाई है, जिस पर आप ने अपनी पहचान बनाई. यदि पार्टी केंद्र सरकार से हर परीक्षा विवाद पर जवाबदेही मांगती है, तो क्या वही कसौटी पंजाब सरकार पर भी लागू होनी चाहिए.
2027 के चुनाव से पहले पंजाब में आप की नैया डगमगाती दिख रही है. भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हालिया पंजाब दौरों ने राज्य की सियासत को और गर्म कर दिया है. विपक्ष का आरोप है कि 2027 का चुनाव जीतने के लिए आम आदमी पार्टी हर संभव कोशिश कर रही है, जबकि उसने अपने वादों के नाम पर पंजाब की जनता को निराश किया है.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका से जब पत्रकारों ने पंजाब में पेपर लीक के मामले पर सवाल पूछा तो दोनों बिना कोई सीधा जवाब दिए वहां से चले गए. इससे पहले भी सीजेपी से जुड़े कई लोगों से पंजाब की आप सरकार में पेपर लीक के मुद्दे पर बात करने की कोशिश की गई लेकिन किसी ने भी इस मुद्दे पर अपना मुंह खोलना उचित नहीं समझा.
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने युवाओं को नशे की समस्या से बाहर निकालने, उनके विदेश पलायन को रोकने और किसानों के लिए नए अवसर पैदा करने में कोई सफलता हासिल नहीं की है. राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से पंजाब एक अत्यंत संवेदनशील राज्य है. आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल युवाओं को राजनीतिक मुद्दों के केंद्र में रखकर अपनी राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं और इससे लोकतांत्रिक विमर्श प्रभावित हो रहा है. साथ ही विपक्षी दलों के देश विरोधी एजेंडा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने से उनकी देश के स्वाभिमान और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने की प्रवत्ति भी सामने आ रही है.
