विश्व में अशांति का कारण बनती इस्लामिक कट्टरपंथी सोच

कुछ दिनों पहले ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में बॉन्डी बीच पर यहूदियों का हनुक्का त्योहार मनाने के लिए जमा हुए लोगों पर बंदूकधारियों ने हमला किया. अधिकारियों के अनुसार कम से कम 12 लोग मारे गए और कई घायल हैं. यह हमला स्पष्ट रूप से यहूदी मज़हब के लोगों को टारगेट करके किया गया था है इसलिए इसे एंटी-सेमिटिक टेरर अटैक माना जा रहा है. हमले में शामिल एक आदमी का नाम नवेद अकरम है, जो सिडनी के दक्षिण-पश्चिम में बोनीरिग का रहने वाला है.

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानी जी ने इसे यहूदी समुदाय को निशाना बनाकर किया गया आतंकी हमला बताया.  उन्होंने कहा, “यह ऑस्ट्रेलियाई यहूदियों को निशाना बनाकर किया गया हमला था, हनुक्का त्योहार का यह पहला दिन अपने धर्म को खुशी से मनाने का दिन होना चाहिए. हमारे देश के दिल पर एंटी सेमिटिज्म और आतंकवाद का एक घिनौना हमला हुआ है. यहूदी ऑस्ट्रेलियाइयों पर हमला हर ऑस्ट्रेलियाई पर हमला है.” 

ऑस्ट्रेलियाई यहूदी समुदाय के नेता इसे 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के इजरायल पर हमले के बाद से एंटी सेमिटिज्म में लगातार वृद्धि में एक बड़ा कदम बता रहे हैं.  कुछ दिन पहले सिडनी में एक यहूदी बेकरी के सामने लाल रंग का उल्टा त्रिकोण स्प्रे से बनाया गया था, यह ऑस्ट्रेलिया में दर्ज की गई पहली ऐसी यहूदी विरोधी घटना थी, जिसके बाद ऐसी घटनाओं की एक लंबी श्रृंखला सामने आई है. पिछले डेढ़ साल से देश भर में आगजनी, फायर बम हमले, दीवारों पर आपत्तिजनक नारे लिखने और नफ़रत फैलाने वाले भाषणों की घटनाएं बड़ी तादाद में दर्ज की गई हैं.  इन घटनाओं की बढ़ती संख्या के बीच देश की प्रमुख खुफिया एजेंसी के प्रमुख ने कहा कि यहूदी विरोध अब उनके जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है. 

कुछ महीने पहले, कश्मीर को भी इस्लामी आतंकवाद का सामना करना पड़ा. नाम पूछ कर धर्म के आधार पर लोगों को मार दिया गया, तब भी दुनिया ने इसे नज़रअंदाज़ कर दिया. अब वही सोच ऑस्ट्रेलिया के शहर सिडनी के प्रसिद्ध बॉन्डी बीच तक पहुंच गई है, जहां यहूदी समुदाय के खिलाफ़ कत्लेआम किया गया.

आज एंटीसेमिटिज्म या एंटी हिंदूत्व सिर्फ़ नफ़रत नहीं रही बल्कि उससे कहीं आगे निकल गई है. कई जगहों पर, चाहे ईस्ट हो या वेस्ट या फिर ऑस्ट्रेलिया, सरकारें इस सच्चाई को छुपाती रही हैं, उदार होकर माफ़ करती रही हैं और दंडित न करके अपरोक्ष रूप से बढ़ावा भी देती हैं. 7 अक्टूबर, 2023 से संकेत दिखने लगे थे, ऑस्ट्रेलिया में हो रहे एंटी सेमिटिज्म भरे प्रदर्शन खुलेआम बढ़ रहे थे उसे बर्दाश्त किया जा रहा था और फैलने दिया जा रहा था. इसी प्रकार ऑस्ट्रेलिया में हिंदू धर्म के मंदिरों पर सिलसिलेवार हमले हुए और उन्हें भी सरकार द्वारा दबा दिया गया.

इतिहास गवाह हैं जब-जब नफ़रत को नज़रअंदाज़ किया जाता है, तब-तब यह बढ़ती है. जब आतंकवाद को माफ़ किया जाता है, तो यह कई गुना बढ़ जाता है. जिसका भुगतान बेगुनाहों को करना पड़ता है. आने वाले समय में भी देश-दुनिया के लोग डर के साए में रहेंगे और सभी में डर बना रहेगा कि कहीं फिर से कोई हमला न हो जाए.


आरएल फ्रांसिस एक कैथोलिक दलित हैं, जो धर्म, सामाजिक न्याय और समकालीन मुद्दों पर सक्रिय रूप से लिखते और विचार रखते हैं.